राजभाषा

 


दिनांक 14 सितंबर 1949 को भारत की संविधान सभा ने हिंदी भाषा को भारत संघ की राजभाषा के रूप में मान्यता दी। संविधान के अनुच्छेद 343 के अनुसार भारत संघ की राजभाषा हिंदी तथा लिपि देवनागरी है। जिस भाषा के माध्यम से प्रशासनिक कार्य संपादित होते हैं, उसे राजभाषा कहते हैं। आज सरकारी कामकाज में हिंदी का प्रयोग दिनोंदिन बढ़ता ही जा रहा है। इसे और बढ़ावा देने के लिए सरकार सतत प्रयत्नशील है। राजभाषा कार्यान्वयन समिति का गठन किया गया है। अखिल भारतीय प्रतियोगिताओं का आयोजन, वरिष्ठ अधिकारियों के लिए कार्यशालाओं का आयोजन, हिंदी में काम करने पर पुरूस्कार एवं प्रोत्साहन देने की योजना एवं हिंदी के प्रचार–प्रसार में कम्प्यूटरों का प्रयोग करना इत्यादि कतिपय ऐसे कदम हैं, जो लक्ष्य तक पहुँचाने में कारगर सिद्ध होंगे। इस पुनीत कार्य में केन्द्रीय विद्यालयों का योगदान बड़ा महवपूर्ण है। राजभाषा के विकास में सभी कर्मचारियों और अधिकारियों का सहयोग आवश्यक है। जहाँ चाह, वहाँ राह।
यह विद्यालय ‘ग’ क्षेत्र के अंतर्गत आता है और इस समय विद्यालय के दैनन्दिन कायों में राजभाषा की स्थिति संतोषजनक बनाने की दिशा में विद्यालय की राजभाषा कार्यान्वयन समिति प्रयास कर रही है। जिसमें निम्नलिखित सदस्य हैं–
1
श्री अर्जुन राम
स्नातकोत्तर अध्यापक ( हिंदी )
2
श्रीमती आर. गायत्री
प्रशिक्षित स्नातक शिक्षिका ( हिंदी )
3
श्री ब्रह्मानंद सिंह यादव
प्राथमिक शिक्षक

गत वषों में किए गए कायों के स्वमूल्यांकन और समीक्षा के दौरान समिति को राजभाषा के कार्यान्वयन की गति के आशानुरूप न हो पाने और इस दिशा में अपेक्षित सफलता न मिल पाने का क्षोभ अवश्य है किंतु समिति सत्र 2015-16 से राजभाषा के कार्यान्वयन की सफलता को लेकर आशान्वित है और इसके प्रति प्रतिबद्ध है। विगत तिमाही मे निम्नलिखित कार्य सम्पन्न हो चुक हैं, जिनका संक्षिप्त विवरण दिया जा रहा है–
1. ‘क’ और ‘ख’ क्षेत्रो को भेजे जाने वाले पत्रों में पाने वाले का पता हिंदी मे ही लिखा जा रहा है।
2. हिंदी में प्राप्त पत्रो का उत्तर हिंदी में ही दिया जा रहा है।
3. विद्यालय की कार्यालय से संबधित सभी मोहरे द्विभाषी हैं और पुस्तकालय की द्विभाषी मोहरे निर्माण की प्रक्रिया में है।
4. सभी सूचना–पटों को द्विभाषी किया गया है और नाम पिट्टकाओं को त्रिभाषी किया गया है।
5. प्रबोध, प्रा और प्रवीण पाठ्यक्रमों के लिये शिक्षकों और कर्मचारियों कोनामांकित किया गया है।
6. विद्यालय में मानक फॉर्मों और अन्य फॉर्मों की सामग्री द्विभाषी रूप मेंअभी उपलब्ध नहीं है, जिसके बारे में कार्य ज़ारी है।
राजभाषा के निरन्तर उत्थान के लिये विद्यालय निरन्तर प्रगतिशील है और अन्य केन्द्रीय विद्यालयों की तरह सितम्बर माह मे हिंदी पखवाड़ा विभिन्न प्रतियोगिताओं , संगीतमय कार्यक्रमों और हिंदी के प्रतिजागरूकता कार्यक्रमों के साथ सम्पन्न होता है। पाठ्योत्तर क्रियाकलापों के अंतर्गत पचास प्रतिशत कार्यक्रम हिंदी से संबंधित आयोजित किये जाते हैं। समय–समय पर विद्यालय क्षेत्रीय स्तर पर विद्यार्थियों द्वारा हिंदी एकांकी प्रस्तुत करता है।

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